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| पांवों के लड़खड़ाने पे तो सबकी है नज़र, सर पे कितना बोझ है कोई देखता नहीं। |
सितम ये है कि हमारी सफों में शामिल हैं,
चराग बुझते ही खेमा बदलने वाले लोग।
आज तो झगड़ा होगा तुझसे ऐ खुदा,
मुश्किलें बढ़ा दी तो सब्र भी बढ़ा देता।
अक्सर वो फैसले मेरे हक़ में गलत हुए,
जिन फैसलों के नीचे तेरे दस्तखत हुए।
पसंद आ गए हैं कुछ लोगों को हम,
कुछ लोगों को ये बात पसंद नहीं आयी।
मुद्दतें हो गयी हैं चुप रहते रहते,
कोई सुनता तो हम भी कुछ कहते।
अपनी हर फतह पर इतना गुरुर मत कर
मिट्टी से पूछ आज सिकंदर कहां है।

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